मरने से पहले जीना ज़रुरी…


प्रत्युषा ने आत्महत्या कर ली…ब्वॉयफ्रेंड से लड़ाई चल रही थी। शादी का लहंगा भी ऑर्डर किया था और माथे पर सिंदूर भी मिला था। इकलौती संतान थी। पहले भी आत्महत्या की कोशिश की थी उसने…..

ऐसी जाने कितनी बातें हैं, जो मीडिया में जोर शोर से हो रही हैं। सोचा था कि हर जगह इस बात का ज़िक्र है, मैं कुछ नहीं कहूंगी। इस समय शांति से बेहतर और कोई चीज़ नहीं हो सकती, पर रोक नहीं पा रही अपनी सोच को।

प्रत्युषा बैनर्जी के गुज़रने के बाद कई सेलिब्रिटिज़ की बातें सुनी मैंने। कई लोग ब्वॉयफ्रेंड को दोष लगा रहे थे, कोई कुछ कह रहा था। किसी ने कहा कि 1 करोड़ का बीमा था…किसी ने कहा कि लोन की वजह से परेशान थी…किसी का ये भी कहना था कि सारे पैसे मां-बाप ले लेते थे, तो वो परेशानी भी थी। ‘बालिका वधू’ में साथ काम कर चुकी एक को-आर्टिस्ट ने कहा कि इस इंडस्ट्री में फेलियर झेलना ज़रुरी है, पर प्रत्युषा ने झेला नहीं तो अब आए फेलियर को वो स्वीकार नहीं कर पा रही। किसी ने कहा कि कुछ लोग अतिवादी होते हैं और प्रत्युषा भी उन्हीं में से एक थी। खुशी भी चरमसीमा पर और दुख भी चरमसीमा पर। बैलेंस नहीं बना पाई, इसीलिए ये रास्ता अपना लिया। पड़ोसियों ने कहा कि प्रत्युषा के ब्वॉयफ्रेंड की एक्स गर्लफ्रेंड (पता है, थोड़ा उलझा है, पर ऐसा ही है अब) भी प्रत्युषा को मारा करती थी। प्रत्युषा तो शादी के लिए तैयार थी, पर उसका ब्वॉयफ्रेंड नहीं।

ये सारी वो बातें हैं, जो टीवी, अख़बार और सोशल मीडिया के जरिए सबके सामने आई। मैंने जब सुना तो मुझे भी बहुत तकलीफ हुई। 24 साल की एक लड़की, अपनी ज़िंदगी से इतनी परेशान हो जाती है कि ज़िंदगी ही छोड़ देती है…स्वीकारना मुश्किल हुआ। मैं उसकी कोई नहीं, फिर भी दुख में हूं, तो ज़ाहिर सी बात है कि घरवालों का तो बुरा हाल होगा। इतनी परेशान थी तो रिश्ते से निकली क्यों नहीं, ज़िंदगी से क्यों निकल गई, ये बात कचोट रही है मुझे।

जब तुमने मुझे छोड़ा था, तब मैं बहुत डरी थी। कैसे रहूंगी अकेले? समाज क्या सोचेगा मेरे बारे में? कितनी कोशिश की थी मैंने तुम्हें रोकने की। हर वो चीज, जो तुम्हें पसंद थी, की थी मैंने। उम्मीद सिर्फ इतनी कि तुम ना जाओ। शादी के सपने भी तुमने दिखाए और जब शादी के सिर्फ 4 दिन बचे थे तब तुमने बीच मझदार में ही मुझे छोड़ मुंह मोड़ लिया था। सारी तैयारी हो चुकी थी पर तुम्हारा दिल किसी और पर आया और मेरा दिल अकेला रह गया।

तुम्हें पता है, तुम्हारे जाने के बाद सब कुछ समेटना कितना मुश्किल था मेरे लिए। घरवालों के आंसु रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। मेरा दिल तो मानो थम सा गया हो। सामने से आती ट्रेन को देखकर पटरी पर लेटने का मन भी हुआ। एक बार तो बस एक सेकेंड से ही मैं दूसरी दुनिया में जाने से रुकी। मैं हताश थी, परेशान थी, दिल टूटा था मेरा…तो मरने का विचार स्वाभाविक ही था।

कुछ ही वक्त बीता था और बीतते हुए वो बता कर गया कि ‘being single’ कोई सजा नहीं है। प्रत्युषा को लेकर राखी सावंत की एक लाइन सही है – ‘भाड़ में गए ब्वॉयफ्रेंड’। अगर किसी के साथ रहना ऐसी सोच देती है तो बेहतर है अकेले रहना। मरे हुए, झूठे रिश्ते में क्यों रहना? क्यों खींचना किसी ऐसी चीज़ को, जो इतनी तड़प दे। देखती हूं उन लोगों को जो रिश्ते में बंधे हैं….जो खुश नहीं हैं…जो बेइमानी कर रहे हैं…जो भाग जाना चाहते हैं कहीं…जो अलग होने से डर रहे हैं…हां, मैं देख रही हूं उन सबको, जिन्हें एक मौका मिले और वो उस रिश्ते से बाहर निकलें। अगर किसी भी सूरत में चीज़ें निभा पा रहे हो, तो रहो। रहना अच्छा है, पर अगर वो ज़िंदगी से दूसरा रास्ता दिखा रहे हैं, तो अलग हो उनसे। अलग होना जबरदस्ती रहने से भी अच्छा है।

हां, मैं जानती हूं और समझती भी हूं कि अकेले रहना मुश्किल है। लोगों के सवाल और उनकी निगाहों का सामना करना आसान नहीं। चिड़चिड़ापन पैदा होता है और कभी कभी उस अकेलेपन में भी लोग ऐसे रास्ते अपनाते हैं पर सोच कर देखो तो रिश्ते में रहने के बाद भी अंत में लोग कहीं ना कहीं तो अकेले ही हैं ना। किसी का साथ चाहिए होता है पर वो साथ किसी भी रुप में हो सकता है। साथी के रुप में किसी का साथ मिल जाए तो बेहतर पर ना मिले तो रोने या शर्मिंदा होने की ज़रुरत नहीं। लोग क्या कहेंगे, ये सोचने की तो बिल्कुल ज़रुरत नहीं। लोग कुछ नहीं सोचते…ये हम हैं जो सोचते हैं कि लोग क्या कहेंगे।

पता है, एक और डर ये सताता है कि अकेले रहने के बाद समाज कहीं हमे जज ना करे। हमारी तरफ देखने का नज़रिया ना बदले। अरे! अगर बदलता है तो बदले। मेरे सुख-दुख में समाज नहीं आ रहा शामिल होने। मुझे मेरी खुशी मेरे सिवा और कोई नहीं दे सकता। मुझे लगता था कि तुम गए तो सब गया…पर देखो ना…तुम गए…पर तुम्हारे सिवा और कुछ नहीं गया। मैं, मेरी खुशी और सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण, मेरी ज़िंदगी अब भी मेरे साथ है।

चीख लो, चिल्ला लो, दिमाग खपा लो जितना भी…पर ये बात तो तुम्हारी समझ से परे ही रहेगी कि एक अकेला मर्द कैसे रह सकता है बिना किसी लांछन के? अगर दिमाग में कभी भी ये बात आए तो फिर ये बात हमेशा ही ध्यान रखनी चाहिए कि कुछ बातों को समझने की ज़रुरत नहीं होती, वो बस बना दी जाती हैं और ये बात भी उन्हीं में से एक है। पति, ब्वॉयफ्रेंड या दुनिया का कोई रिश्ता, जो इतनी कड़वाहट दे कि आत्महत्या का रास्ता अपनाने का मन करे, उस रिश्ते को छोड़ देना बेहतर है। ज़िंदगी से बड़ी चीज़ और क्या हो सकती है हमारे पास? सच कहूं, तो उससे ‘खूबसूरत’ चीज़ क्या हो सकती है? पैसा, प्यार या कोई भी ऐसी चीज़, जिसकी परेशानी इतना परेशान करे, उसे खोने का ग़म क्या करना? किसी भी चीज़ का मोह तो उलझाएगा ही, लाज़िमी है…पर रहोगे तो बहुत कुछ करोगे या पाओगे। नहीं रहने पर सिर्फ एक चीज़ रहती है – ‘कुछ नहीं’

मत डरो किसी बात से…किसी भी बात से…मत दुखी हो किसी बात से…किसी भी बात से….ज़िंदगी खोने के लिए हिम्मत चाहिए पर ज़िंदगी जीने के लिए उससे ज़्यादा हिम्मत चाहिए। पैदा करो वो हिम्मत…

मरना तो सबको है ही…पर मरने से पहले जीना ज़रुरी है…

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