प्यार


प्यार कुछ चीज़ें साथ लेकर आता है। खूबसूरत एहसास, प्यारी सी गुदगुदी, दिन भर चेहरे पर बनी रहने वाली वो मुस्कान, ऑंखों में चमक, हमेशा दिमाग में रहने वाली एक सोच, दर्द की वजह, हर दर्द का इलाज…

तुम जब आए तो मेरी ज़िंदगी में भी कुछ ऐसी ही चहल पहल रहने लगी। ऐसा नहीं था कि उससे पहले मेरी ज़िंदगी में कोई रस नहीं था या फिर वो रुखी सूखी बंज़र सी थी…पर हां, ‘वो बात’ तो नहीं ही थी, जो तुम्हारे आने के बाद हुई।

कभी कभी तुमको देखकर बहुत हैरान होती हूं। कैसे तुम बस मुस्कुरा कर मुझे देखते रहते हो ना, जैसे वो तुम्हारा पसंदीदा काम हो। मेरी बकर-बकर बंद ही नहीं होती, जैसे पूरी दुनिया की बातें अगर मैंने तुमको नहीं बताई तो दुनिया का रुकना तय है। हर शब्द के लिए कान बने हैं, मेरे शब्दों के लिए वो कान तुम्हारे हैं।

हर कोई कुछ ना कुछ ढूंढता रहता है। मैं भी ढूंढ रही थी…या यूं कहूं कि एक अजीब से खालीपन के एहसास से गुज़र रही थी, जिसको शायद शब्दों में कभी भी बयां ना कर पाऊं। सब कुछ था पास में…पता नहीं पर वो क्या था, जो बेचैन करता था। तुमसे मिलने के बाद मेरे सारे सवालों का जवाब मिल गया। मुझमें मैं रही ही नहीं, तुम समा गए थे पूरी तरह। मैंने प्रेम को समझा…प्रेमिका बनी…जुनूनी बनी…बदनाम हुई…दूसरों के साथ क्या क्या होता है प्रेम में, इसे सुनकर मैंने अपने अंदर किसी डर को महसूस नहीं किया…लाभ-हानि से परे हो गई…

घर आने से पहले तुम हमेशा पूछते हो कि क्या बना है, क्या क्या इंतज़ाम है? तो आज मैं कहना चाहती हूं-

मैं हूं तुम्हारे लिए…पूरी की पूरी…

 

 

2 thoughts on “प्यार

  1. ऐसा लगा ज़िन्दगी की खुशनुमा सचाई बयाँ कर दी। बहुत खूब श्वेता। ऐसे ही लिखती रहो।बहुत प्यार लिखती हो। दिल को छू जाता है।

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